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विश्व युध्द

5 बड़े झटके जिन्होंने 2024 के इज़राइल–हिज़्बुल्लाह संघर्ष में लेबनान की राजनीति को हिला दिया

समीर सिंह 'भारत' : मुख्य संपादक

युध्द – रिपोर्ट : वर्ष 2024 का इज़राइल–लेबनान संघर्ष पश्चिम एशिया की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इज़राइल ने इस संघर्ष के दौरान हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाई और नवंबर 2024 के अंत में हुए युद्धविराम के बाद भी संगठन के पुनर्गठन प्रयासों को लगातार चुनौती दी। परिणामस्वरूप, न केवल हिज़्बुल्लाह की सैन्य ताकत कमजोर हुई, बल्कि लेबनान की राजनीति में उसका प्रभाव भी घटा, जिससे देश में शक्ति-संतुलन का नया अध्याय शुरू हुआ।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

7 अक्टूबर 2023 को क्षेत्र में व्यापक हिंसा भड़कने के बाद 8 अक्टूबर 2023 से Hezbollah ने इज़राइल के उत्तरी क्षेत्रों पर लगभग रोज़ाना ड्रोन, मिसाइल और रॉकेट हमले शुरू कर दिए। इन हमलों का उद्देश्य इज़राइल पर दबाव बनाना और गाज़ा युद्ध के संदर्भ में “प्रतिरोध धुरी” की एकजुटता दिखाना था।

हालाँकि, शुरुआती महीनों में ये हमले प्रतीकात्मक अधिक और रणनीतिक रूप से सीमित प्रभाव वाले साबित हुए। इज़राइल ने अपने नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए सीमा के पास बड़े पैमाने पर निकासी और सुरक्षा उपाय लागू किए, जबकि सैन्य दृष्टि से स्थिति का आकलन करता रहा।

इज़राइल की सैन्य प्रतिक्रिया

सितंबर 2024 में Israel Defense Forces (आईडीएफ) ने हवाई अभियान की शुरुआत की और अक्टूबर 2024 में सीमित जमीनी अभियान भी चलाया। इन अभियानों का उद्देश्य हिज़्बुल्लाह की सैन्य अवसंरचना, हथियार भंडार और नेतृत्व तंत्र को निशाना बनाना था।

इज़राइली सैन्य सूत्रों के अनुसार, 2024 के संघर्ष में आईडीएफ ने हिज़्बुल्लाह को 2006 के युद्ध की तुलना में कहीं अधिक क्षति पहुँचाई—और वह भी अपेक्षाकृत कम लागत पर।

  • लगभग सभी वरिष्ठ कमांडरों को मार गिराया गया।

  • संगठन के लगभग 45 प्रतिशत लड़ाके मारे गए या अक्षम हुए।

  • बड़े पैमाने पर हथियार भंडार नष्ट कर दिए गए।

  • दक्षिणी लेबनान में सुरंग नेटवर्क और सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

इन कार्रवाइयों ने हिज़्बुल्लाह की कमान-नियंत्रण क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

युद्धविराम के बाद भी जारी कार्रवाई

नवंबर 2024 के अंत में युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन इज़राइल ने हवाई हमले पूरी तरह बंद नहीं किए। इज़राइल का तर्क था कि हिज़्बुल्लाह युद्धविराम का लाभ उठाकर पुनर्गठन की कोशिश कर रहा है।

इसलिए, आईडीएफ ने लेबनान में लगभग दैनिक आधार पर लक्षित हवाई हमले जारी रखे। इन हमलों का उद्देश्य हथियारों की आपूर्ति, कमांड संरचना और पुनर्निर्माण प्रयासों को रोकना था। परिणामस्वरूप, हिज़्बुल्लाह के लिए अपनी सैन्य क्षमता को बहाल करना कठिन हो गया।

राजनीतिक प्रभाव: घटती पकड़

सैन्य पराजय का असर सीधे लेबनान की राजनीति पर पड़ा। 2023 से पहले तक हिज़्बुल्लाह लेबनानी सरकार में प्रभावशाली भूमिका निभाता था और उसके पास वास्तविक “वीटो शक्ति” थी, जिससे वह कैबिनेट के कई निर्णयों को रोक सकता था।

लेकिन 2024 के अंत तक संगठन की राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ने लगी। नई परिस्थितियों ने लेबनान में नेतृत्व परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।

Nawaf Salam ने फरवरी 2025 में जब अपना मंत्रिमंडल गठित किया, तो हिज़्बुल्लाह के पास मौजूद कैबिनेट सीटों की संख्या घटा दी। इससे संगठन की निर्णय प्रक्रिया पर पकड़ कम हो गई।

2008 से 2019 के बीच हिज़्बुल्लाह की वीटो शक्ति के कारण कई सुधारात्मक कानून पारित नहीं हो पाए थे। लेकिन नई सरकार ने इस प्रवृत्ति को बदलने का संकेत दिया।

हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की पहल

सितंबर 2025 में लेबनानी सरकार ने Lebanese Armed Forces (एलएएफ) की उस योजना को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करना था।

यह कदम ऐतिहासिक था, क्योंकि पूर्ववर्ती सरकारें या तो ऐसा करने में असमर्थ थीं या इच्छुक नहीं थीं। इस निर्णय ने संकेत दिया कि राज्य “हथियारों पर एकाधिकार” की नीति को लागू करना चाहता है—अर्थात देश में केवल सरकारी सेना के पास ही हथियार रखने का अधिकार हो।

पुराने सहयोगियों का साथ छोड़ना

संगठन की सैन्य हार और आक्रामक राजनीतिक रुख ने उसके पुराने सहयोगियों को भी असहज कर दिया।

Free Patriotic Movement (एफपीएम) ने अक्टूबर 2024 में, इज़राइली अभियान शुरू होने के बाद, हिज़्बुल्लाह के साथ अपनी दो दशक पुरानी साझेदारी समाप्त कर दी। एफपीएम ने संगठन की 7 अक्टूबर युद्ध में भागीदारी पर असहमति जताई।

इसके अलावा, Nabih Berri और Marada Movement जैसे पारंपरिक सहयोगियों ने भी राज्य के हथियारों पर एकाधिकार का समर्थन किया—जो हिज़्बुल्लाह के लिए एक बड़ा झटका था।

क्षेत्रीय और रणनीतिक परिणाम

इज़राइल का दावा है कि 2024 का अभियान उसकी “निवारक क्षमता” को मजबूत करने में सफल रहा। हिज़्बुल्लाह के लगातार हमले इज़राइल पर कोई निर्णायक लागत नहीं थोप पाए, जबकि आईडीएफ ने संगठन को भारी नुकसान पहुँचाया।

रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष ने लेबनान के भीतर शक्ति समीकरण को बदल दिया है। हिज़्बुल्लाह अब न केवल सैन्य दृष्टि से कमजोर है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अधिक असुरक्षित स्थिति में है।

भविष्य की चुनौतियाँ

हालाँकि हिज़्बुल्लाह पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उसके पास अभी भी एक संगठित ढांचा, समर्थकों का आधार और क्षेत्रीय नेटवर्क मौजूद है।

लेकिन 2024–25 की घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन पहले जैसा प्रभावशाली नहीं रहा। लेबनान की नई सरकार के लिए यह अवसर है कि वह संस्थागत सुधारों को आगे बढ़ाए और राज्य की संप्रभुता को मजबूत करे।

दूसरी ओर, यदि हिज़्बुल्लाह राजनीतिक या सैन्य रूप से पुनर्गठित होता है, तो क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ सकता है।

2024 का इज़राइल–हिज़्बुल्लाह संघर्ष केवल सीमित सैन्य टकराव नहीं था, बल्कि उसने लेबनान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को गहराई से प्रभावित किया।

इज़राइल ने सैन्य दृष्टि से संगठन को गंभीर क्षति पहुँचाई और युद्धविराम के बाद भी उसके पुनर्गठन को बाधित किया। वहीं, लेबनान में नई सरकार के उभार और निरस्त्रीकरण की पहल ने संकेत दिया कि देश में सत्ता संतुलन बदल रहा है।

आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या हिज़्बुल्लाह अपनी पुरानी स्थिति फिर से हासिल कर पाता है या लेबनान एक नए राजनीतिक युग की ओर बढ़ता है, जहाँ राज्य की भूमिका अधिक मजबूत और संगठित हो।

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