इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर की ओर बढ़ रहा भारत का रियल एस्टेट: Lexora Realty का Vision 2030
समीर सिंह : मुख्य संपादक

बेंगलुरु : भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र इस समय एक स्पष्ट परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बंदरगाहों, हवाई अड्डों, टेक्नोलॉजी पार्कों, डेटा सेंटर्स और नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़ते निवेश के साथ अब विकास केवल पारंपरिक शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं रहा। इसके बजाय, रियल एस्टेट की वृद्धि धीरे-धीरे उन क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है, जहां मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार के अवसर और दीर्घकालिक योजना मौजूद है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि रियल एस्टेट विकास का अगला चरण सट्टा आधारित विस्तार से हटकर उन इलाकों पर केंद्रित होगा, जहां लॉजिस्टिक्स, एविएशन, तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा का संगम देखने को मिल रहा है। ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित कॉरिडोर भारत के भविष्य के शहरी और औद्योगिक विकास की रीढ़ बनते जा रहे हैं।
इसी बदलते परिदृश्य में Lexora Realty Holdings Pvt Ltd ने अपना विजन 2030 रोडमैप प्रस्तुत किया है, जिसके तहत कंपनी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित क्षेत्रों में विविध रियल एस्टेट पोर्टफोलियो विकसित करने की योजना बना रही है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक लगभग ₹300 करोड़ की संपत्ति विकसित करने का लक्ष्य तय किया है, जो दीर्घकालिक आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
भारत के उभरते विकास कॉरिडोर
बेंगलुरु के आसपास, केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप स्थित एयरो सिटी कॉरिडोर तेजी से एक महत्वपूर्ण एविएशन-आधारित व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। एयरबस, बोइंग, डसॉल्ट एविएशन, सैफ्रान और जीई एविएशन जैसी वैश्विक एयरोस्पेस और रक्षा कंपनियों की मौजूदगी से आने वाले वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है।
इस विकास के चलते ऑफिस स्पेस, कर्मचारियों के लिए आवास, होटल, स्वास्थ्य सेवाएं, रिटेल और शैक्षणिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रस्तावित सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी के साथ-साथ कर्नाटक सरकार की KWIN City पहल भी इस क्षेत्र के विकास को गति दे रही है। शहरी नियोजकों के अनुसार, हवाई अड्डों के आसपास विकसित होने वाले क्षेत्र अक्सर अस्थायी रियल एस्टेट चक्रों के बजाय स्थायी आर्थिक केंद्र बनते हैं।
पश्चिमी तट पर, केरल का विझिंजम डीप सी पोर्ट कॉरिडोर एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स के नजदीक स्थित और प्राकृतिक गहरे जल की सुविधा से युक्त यह बंदरगाह अब बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने लगा है। इतिहास गवाह है कि इस प्रकार के बंदरगाहों ने दुबई और सिंगापुर जैसे वैश्विक व्यापार केंद्रों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।
विझिंजम पोर्ट के विस्तार के साथ ही नागरकोइल–तिरुवनंतपुरम–कोच्चि बेल्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, सहायक उद्योगों, पर्यटन और आवासीय परियोजनाओं में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
पूर्वी भारत में, आंध्र प्रदेश का विशाखापट्टनम एआई सिटी क्षेत्र एक तकनीक और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में आकार ले रहा है। गूगल जैसी वैश्विक टेक कंपनियों की शुरुआती भागीदारी और भविष्य में संभावित डेटा सेंटर निवेश से यहां वाणिज्यिक रियल एस्टेट, गुणवत्तापूर्ण आवास और कुशल कार्यबल के लिए शहरी सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर्स को दीर्घकालिक रियल एस्टेट एसेट के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर इस पूरे कॉरिडोर के विकास पर पड़ेगा।
इसी तरह, हैदराबाद का प्रस्तावित फ्यूचर सिटी कॉरिडोर नवाचार, अनुसंधान और वैश्विक व्यापार इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित एक नियोजित विस्तार का उदाहरण है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मास्टर-प्लान्ड परियोजनाएं अव्यवस्थित शहरी विस्तार की तुलना में लंबे समय तक अधिक टिकाऊ साबित होती हैं।
प्रमुख महानगरों से परे, कर्नाटक–आंध्र प्रदेश सीमा क्षेत्र के कुछ हिस्से भी नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के कारण निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर सोलर और एग्री-वोल्टाइक परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें सौर ऊर्जा उत्पादन को कृषि गतिविधियों के साथ जोड़ा जाता है। चीन जैसे देशों में पहले से सफल रहे ये मॉडल भूमि मूल्य में दीर्घकालिक वृद्धि, रोजगार सृजन और भारत के उभरते कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम को समर्थन देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।












