
नई दिल्ली – महाकुंभ 2025 में सफल और प्रभावशाली भागीदारी के बाद कोका-कोला इंडिया ने माघ मेला 2026 में अपनी उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने की घोषणा की है। देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माघ मेला के दौरान कंपनी प्रयागराज और उससे जुड़े प्रमुख यात्रा मार्गों पर व्यापक स्तर पर पेयजल और हाइड्रेशन सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए स्थानीय रोजगार सृजन तथा उपभोक्ता-केंद्रित अनुभवों को बढ़ावा दे रही है।
माघ मेला भारत की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु संगम तट पर पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे विशाल जनसमूह के बीच स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कोका-कोला इंडिया ने इस वर्ष अपने प्रयासों का दायरा बढ़ाते हुए हाइड्रेशन पहुंच को कई गुना विस्तारित किया है।
हाइड्रेशन सुविधाओं का विस्तार
कंपनी ने माघ मेला क्षेत्र में विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर पेयजल वितरण केंद्र, मोबाइल कूलिंग यूनिट्स और रीसाइक्लेबल बोतलों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। प्रयागराज शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और संगम क्षेत्र के आसपास विशेष हाइड्रेशन जोन स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुरक्षित और सुलभ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर, विशेषकर वे मार्ग जिनसे होकर श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं, वहां भी अस्थायी रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स बनाए गए हैं। इससे लंबी यात्रा कर रहे यात्रियों को राहत मिल रही है और उन्हें सुरक्षित पेयजल तक आसान पहुंच मिल रही है।

स्थानीय रोजगार और सामुदायिक भागीदारी
माघ मेला 2026 के दौरान कोका-कोला इंडिया ने स्थानीय युवाओं, छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों के साथ साझेदारी कर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। कंपनी ने अस्थायी बिक्री केंद्रों और वितरण नेटवर्क के संचालन के लिए स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी है। इससे न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि हजारों परिवारों की आय में भी वृद्धि हुई है।
कंपनी के प्रतिनिधियों के अनुसार, “हमारा उद्देश्य केवल उत्पाद उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि समुदाय के साथ मिलकर एक सकारात्मक और टिकाऊ प्रभाव छोड़ना है। माघ मेला जैसे आयोजन स्थानीय उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।”
उपभोक्ता-केंद्रित अनुभव
कोका-कोला इंडिया ने इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष उपभोक्ता-केंद्रित अनुभवों की भी व्यवस्था की है। मेला क्षेत्र में स्थापित ब्रांडेड विश्राम स्थल, सेल्फी जोन और डिजिटल सहभागिता मंचों के माध्यम से आगंतुकों को आधुनिक और पारंपरिक अनुभवों का समन्वय प्रदान किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और स्थानीय कला को भी मंच दिया गया है, जिससे मेला अनुभव और समृद्ध हो रहा है।
इसके साथ ही, कंपनी ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्लास्टिक कचरे के संग्रह और पुनर्चक्रण के लिए विशेष अभियान भी चलाया है। स्वयंसेवकों और स्थानीय निकायों के सहयोग से रीसाइक्लिंग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि स्वच्छ और हरित मेला सुनिश्चित किया जा सके।
स्थिरता और पर्यावरणीय पहल
कोका-कोला इंडिया ने माघ मेला 2026 के दौरान सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप कई पर्यावरणीय पहलें शुरू की हैं। जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी ने यह सुनिश्चित किया है कि उसके सभी अस्थायी ढांचे पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार किए जाएं और कार्यक्रम समाप्ति के बाद स्थल की स्वच्छता बनाए रखी जाए।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि जल पुनर्भरण और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण के लिए भी विभिन्न परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। इससे दीर्घकालिक जल संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

प्रयागराज में आर्थिक गतिविधियों को बल
माघ मेला 2026 के दौरान कोका-कोला इंडिया की सक्रिय भागीदारी से प्रयागराज में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है। परिवहन, खानपान, खुदरा व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में मांग बढ़ी है। कंपनी के वितरण नेटवर्क से जुड़े छोटे दुकानदारों और विक्रेताओं को भी अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हुए हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी निजी क्षेत्र के इस सहयोग का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की भागीदारी से आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मिलती है और आगंतुकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
सांस्कृतिक धरोहर के साथ ब्रांड की सहभागिता
भारत में कोका-कोला इंडिया की उपस्थिति केवल व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। कंपनी देश की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं के साथ जुड़ाव को महत्वपूर्ण मानती है। माघ मेला 2026 में उसकी भागीदारी इसी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जहां आधुनिक प्रबंधन और पारंपरिक आस्था का संतुलन स्थापित किया गया है।
मेला क्षेत्र में कंपनी द्वारा लगाए गए सूचना बोर्ड और सहायता केंद्र श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश, आपातकालीन सहायता और अन्य उपयोगी जानकारी भी प्रदान कर रहे हैं। इससे आयोजन के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को भी सहयोग मिल रहा है।
डिजिटल और तकनीकी सहयोग
इस वर्ष कंपनी ने डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग बढ़ाया है। क्यूआर कोड आधारित जानकारी, मोबाइल ऐप्स के माध्यम से लोकेशन ट्रैकिंग और विशेष ऑफर जैसी सुविधाओं को जोड़ा गया है। इससे आगंतुकों को आवश्यक सेवाओं तक शीघ्र पहुंच मिल रही है और मेला अनुभव अधिक सुव्यवस्थित हो रहा है।
डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए भी विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे नकद लेनदेन में कमी आए और पारदर्शिता बढ़े।

भविष्य की योजनाएं
माघ मेला 2026 में सुदृढ़ उपस्थिति के साथ कोका-कोला इंडिया ने यह संकेत दिया है कि वह भविष्य में भी भारत के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी। कंपनी का लक्ष्य केवल ब्रांड विस्तार नहीं, बल्कि सामुदायिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और उपभोक्ता सुविधा को प्राथमिकता देना है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “हम भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करते हैं। माघ मेला जैसे आयोजन हमें समुदायों के साथ जुड़ने और सकारात्मक योगदान देने का अवसर प्रदान करते हैं। हमारा प्रयास है कि हम हर स्तर पर मूल्य निर्माण करें—चाहे वह हाइड्रेशन हो, रोजगार हो या पर्यावरण संरक्षण।”
माघ मेला 2026 में कोका-कोला इंडिया की विस्तारित भागीदारी यह दर्शाती है कि निजी क्षेत्र किस प्रकार बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोगी भूमिका निभा सकता है। प्रयागराज और उससे जुड़े प्रमुख मार्गों पर बढ़ी हाइड्रेशन पहुंच, स्थानीय रोजगार सृजन और उपभोक्ता-केंद्रित अनुभवों के माध्यम से कंपनी ने आयोजन को अधिक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने में योगदान दिया है।
भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धारा के इस विराट संगम में कोका-कोला इंडिया की सक्रिय उपस्थिति न केवल व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सामुदायिक स्तर पर भी एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है। माघ मेला 2026 में कंपनी की यह पहल आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक आयोजनों में कॉर्पोरेट सहभागिता का एक नया मानक स्थापित कर सकती है।












